अभ्युदय

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Dr.KAILASH DWIVEDI


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एक निवेदन उनके प्रति है-

Posted On: 25 Oct, 2011  
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पुतला दहन शमशान में करें !

Posted On: 27 Sep, 2011  
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अभ्युदय;दलित उत्थान की एक कहानी

Posted On: 24 Sep, 2011  
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तस्वीर

Posted On: 20 Sep, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम ! बच्चे का नाम.....????? अब यह मत कह देना कि ....कहीं यह बच्चा .....??? हा.. हा.. हा.. | कहानी का कहानी का पार्ट -टू बनाने का प्रयत्न कर रहा हूँ आप सब का आशीर्वाद रहा तो जल्द ही प्रस्तुत होगा | सफेद बालो वाला सठिया गया है .......... उसकी समझ में ज्यादा देर कोई बात नहीं टिकती | .......नीम वाली दवाई का हैवी डोज से नपुंसकता का खतरा रहता है ........अब इतनी भी कड़ी सजा कम से कम आप जैसा नरम दिल व्यक्ति नहीं दे सकता | .......... संतोष भाई की बात ही कुछ और है वे आल राउंडर हैं शायद कोई हल निकाल लें | .....सैयद भाईजान भी प्रयासरत हैं मुझे यह जानकर तसल्ली है कि मैं अकेला सताया हुआ नहीं हूँ| ..........आखरी उपाय की परिणिति .......राजकमल हजारे......के रूप में ... ...चिंता मत करना गुरुदेव एक प्राकृतिक चिकित्सक होने के नाते मुझे भी लम्बे उपवास का अभ्यास है , आपका पूरा साथ दूंगा | आप सभी को भी सपरिवार दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये | आभार !

के द्वारा: Dr.KAILASH DWIVEDI Dr.KAILASH DWIVEDI

आदरणीय डाक्टर साहिब ..... सादर प्रणाम ! मैंने पहले भी इसी विषय पर एक कहानी पढ़ी थी जिसमे कि उस किराए कि कोख वाली माता से बच्चा लेने वाले कि असमी ही मौत हो जाती है और वोह बेचारी बिना पैसे के ही उस अनचाहे बच्चे को पालने पर मजबूर हो जाती है ...... ****************************************************************************** वैसे मेरा पुलसिया दिमाग कहता है कि शायद आपको उस बच्चे का नाम पता है ..... आप इस कहानी का पार्ट -टू बनाए इस पहले भाग से ही अंदाजा हो रहा है कि दूसरा भाग जबरदस्त होगा क्योंकि इसमें अपार संभावनाए छिपी हुई है ..... ********************************************************************************************************** जिस तरह के बेशर्म और ढीठ ब्लागरों का आपने जिक्र किया है उनमे से एक को तो मैंने उनके बेहद सफेद बालो के बावजूद भी कड़वी दवाई दी थी लेकिन उसका असर केवल कुछेक दिन ही रहा ..... अब हम सभी को ऐसे ब्लागरों के ब्लॉग पर जाकर नीम वाली दवाई का हैवी डोज देना चाहिए ..... जागरण के फीडबैक पर भी कोशिश कि जा सकती है हमारे प्रिय सैयद भाईजान कि ही तरह से ...... ************************************************************************************************************** हमारे प्रिय संतोष भाई के इस मुहीम में बढ़ चढ़ कर भाग लेने और साथ देने कि हम सभी को उम्मीद और आशा है ..... मैं उम्मीद करता हूँ कि हम सभी पीड़ित जन मिलजुल कर इस समस्या का कोई न कोई हल जरूर निकाल ही लेंगे ..... नहीं तो फिर मुझको राजकमल हजारे बनना पड़ेगा आखरी उपाय के तौर पर .... हा हा हा हा आप सभी को सपरिवार दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/10/17/“खुदा-का-खत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: Dr.KAILASH DWIVEDI Dr.KAILASH DWIVEDI

प्रिय डॉ कैलाश जी मन को छू जाने वाली कहानी सच में सर्रोगेट वोमन की गजब कहानी है कई सिनेमा भी मैंने देखे इस पर ..क्या क्या भाव अच्छे बुरे आते हैं मन में ..फैसला करना कितना कठिन हो जाता है की इसे कितना उचित ठहराएं ..कहीं कहीं निःसंतान लोग के लिए इसे जायज ठहरा देते हैं तो कहीं कहीं केवल पैसे के लिए औरतों को कोख किराये पर देना और अपने जाने बच्चे को दूर कर देना दिल को कचोट जाता है दर्द भर जाता है मानवता पर एक प्रश्न चिन्ह लग जाता है ..किया ही क्या जाए हमारा ये मानव जीवन भी आज बिना समझौते के चल नही पाता एक पग भी ..इस लिए सब वक्त के हिसाब से जायज ठहरा भी देता है मन ..बहुत सुन्दर विषय आप का ..बहुत आभार .जो भी हो औरत को सम्मान मिले और बच्चे को भरपूर प्यार ..\ भ्रमर ५ महिमा , इस बच्चे में ‘ एग ‘ अवश्य मधु के हैं परन्तु स्पर्म मेरे और कोंख तुम्हारी है , माँ वही होती है जो प्रसव पीड़ा को महसूस करे, उसे पाले -पोसे | कानूनन भी मैं जैविक पिता हूँ इस नाते यह मेरा बच्चा, और तुम मेरी पत्नी हो इसलिए यह हमारा बच्चा है |’ महिमा मधु कि नादानी से व्यथित अवश्य थी परन्तु वह औलाद के सुख की कल्पना से खुश थी

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के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

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