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सेरोगेट मदर;एक विज्ञान कथा

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वर्तमान में विज्ञान ने जितनी प्रगति की उतना ही व्यक्ति के नैतिक मूल्यों में गिरावट आई है | इस कहानी में नारी के दो रूपों का वर्णन है एक जो आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल है और दूसरी वह जिसमें आज भी भारतीय संस्कृति की झलक दिखती है |

पस्तुत है एक विज्ञान कथा :

मधु ! हमारी शादी को पांच साल हो गये हैं, अब हमे इस बात पर राजी हो जाना चाहिए कि हमारी बगिया में भी एक नन्हा सा फूल खिले | रोहन ने अपनी पत्नी मधु से भावुक होकर कहा तो मधु भड़क उठी- ‘ आप क्या चाहते हो मैं कली न रहकर तुम्हारे लिए फूल खिलाऊँ | मुझसे क्या बच्चा पैदा करने के लिए ही तुमने शादी कि थी ?
‘ यह तुम क्या कह रही हो मधु ?, क्या तुम सम्पूर्णता नहीं चाहती ? …….तुम जानती हो -नारी कि सम्पूर्णता माँ बनने में ही है | फिर हमारी करोड़ो कि संपत्ति है , इसका कोई वारिस होना चाहिए या नही….|’ रोहन उद्धिग्न हो उठा था |
‘ यह सब ख्याली व् पुरानी विचारधाराएँ हैं कि नारी कि सम्पूर्णता माँ बनने में ही है | मैं नही मानती ऐसी मान्यताएं |’
‘ मधु, समझने कि कोशिश करो , सोचो कल को मुझे कुछ हो जाये तो तुम किस के सहारे रहोगी |’
‘ मुंझे सहारे कि जरूरत नही है, और आप कान खोलकर सुन लें कि मैं अभी माँ बनकर समय से पहले बूढी नही होना चाहती |’
‘ मैं मानता हूँ मधु , कि तुम आधुनिक परिवेश में पली-बढ़ी हो , विदेश में शिक्षा ग्रहण की है तुमने परन्तु इसका मतलब यह तो नही कि तुम अपनी संस्कृति,परम्पराओं व् नैतिक मूल्यों से ही विमुख हो जाओ | मैं तुम्हारा पति हूँ ………………..|’
रोहन अपना वाक्य पूरा भी नही कर पाया था कि मधु बीच में ही बोल पड़ी —
‘ आप मेरे पति हैं, इसका मतलब यह नही कि मैं आपके हर निर्णय से सहमत हो जाऊँ | आप पुरुष हैं पर हमें समानता का पूरा अधिकार है, मैं आपकी दासी नही बन सकती |’
तैश में आकर मधु ने कहा तो रोहन इस विषय को आगे न बढ़ाने कि गरज से दुसरे कमरे में चला गया | वह कोस रहा था उस दिन को जब उसने मधु को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था | हालाँकि ऐसा नही था कि दोनों में प्रेम न हो परन्तु यही एक ऐसा विषय था जिस पर दोनों कि सहमती नही बन पा रही थी | रोहन मधु के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझता था, वह चाहता था कि जल्द ही उसका वारिस आ जाये परन्तु मधु स्वछन्द विचारों कि लड़की थी वह जिन्दगी को मौज-मस्ती व् ऐशो आराम से जीना चाहती थी , वह सिर्फ वर्तमान में जीती थी , भविष्य उसके लिए कोई मायने नही रखता था , परन्तु रोहन भविष्य के प्रति सजग था |इस विषय पर दोनों के विचारों में असमानता होते हुए भी रोहन इस बात से आश्वस्त था कि मधु को एक न एक दिन समझ आ ही जाएगी | वह तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल पड़ा|
‘ नाश्ता नही करोगे आज ? ‘ मधु ने कहा |
‘ भूख नहीं है ‘ रोहन ने कहा और ब्रीफकेस उठाकर चल दिया |
मधु रोहन के सामने खड़ी होकर अपने दोनों हाँथ रोहन के गले में डाल दिए- ‘ सारी, मैं कुछ ज्यादा ही बोल गयी | पर मै वादा करती हूँ कि शाम को इस विषय पर चर्चा करके हम कोई न कोई हल जरुर निकालेंगे |’
मधु का बदला हुआ मिजाज देख कर रोहन भी शांत हो गया और कुछ आश्वस्त भी हुआ कि शायद शाम तक मधु सोच-विचारकर राजी हो जाये |
********** दिन भर मधु इस विषय को लेकर सोचती रही | अभी वह टेबल पर पड़ी पत्रिकाओं को उल्ट-पुलट रही थी अचानक एक विज्ञापन पर नजर पड़ी — ” आवश्यकता है एक सेरोगेट मदर की | इच्छुक महिलाएं संपर्क करे |” मधु की आँखें चमक उठीं वह बेसव्री से शाम होने का इंतजार करने लगी |
************ डिनर का दौर चल रहा था | रोहन अभी सुबह वाली बात को शुरू कर माहौल में नीरसता नहीं लाना चाहता था , वह चाहता था कि इस विषय पर मधु ही पहल करे | उसकी सोच सकारात्मक रही , खाने के बीच में ही मधु ने कहा –
‘ रोहन ! क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम सेरोगेट मदर के माध्यम से अपनी इच्छा पूरी कर लें |’
‘ व्हाट………, तुम कहना क्या चाहती हो हो मधु | रोहन चौंक उठा |
‘ इसमें बुराई ही क्या है ? अब जमाना बदल गया है , फिर बच्चे के जैविक माँ-बाप तो हमीं रहेंगे |’
सेरोगेट मदर……………. यानि ” किराये कि माँ की कोंख |” रोहन का सर भन्ना गया |
‘ मुझे सोचने का समय दो मधु , इतना बड़ा निर्णय मैं इतनी जल्दी नही ले सकता |’
‘ आराम से सोचिये , जल्दी मुझे नहीं , आपको है |’ मधु ने व्यंगात्मक लहजे में कहा |
*********** रोहन को नींद नहीं आ रही थी | उसे मधु से ऐसी उम्मीद नही थी | वह बार-बार करवट बदल रहा था एक ही बात उसके जेहन में गूंज रही थी —-’ सेरोगेट मदर……… किराये की कोंख ….|’
‘ क्या मेरा बच्चा किराये की कोंख में पलेगा ? ‘ उसने स्वयं से प्रश्न किया |
‘ अन्य कोई रास्ता भी तो नहीं है | मधु को मैं छोड़ नही सकता, अंततः रोहन ने मधु की बात में ही सहमती दे दी | सोंचा कोंख ही तो किराये की होगी बच्चे के जैविक माँ-बाप तो हमीं होंगे | मधु की जिद भी पूरी हो जाएगी और हमें संतान भी मिल जाएगी |’
*********** रोहन ने एक निजी अस्पताल में कार्यरत अपने मित्र डॉ. मनीष के सामने यह बात रखी तो वह इस पर सहर्ष तैयार हो गया |
‘ सेरोगेट मदर कौन होगी ?’ डॉ. मनीष ने पूंछा |
‘ उसका तो अभी चयन होना बाकी है |’ रोहन ने कहा |
डॉ. मनीष – ‘ वैसे कई पेशेवर सेरोगेट मदर हमारे कान्टेक्ट में हैं , यदि आप चाहे ……..’ डॉ. अपनी बात पूरी भी नही कर पाया था, रोहन बीच में ही बोल पड़ा ———
‘ नहीं .. डॉ. मनीष , हमें पेशेवर सेरोगेट मदर नहीं चाहिए, हम उसकी व्यवस्था स्वयं करेंगे |’
************** अगले दिन शहर के प्रमुख समाचार पत्रों में ” आवश्यकता है एक स्वस्थ्य, सुन्दर सेरोगेट मदर की ….संपर्क करें – रोहन मल्होत्रा ……………|” विज्ञापन छप गया |
*********** अचानक श्यामू की तवियत ज्यादा ख़राब हो गयी ,यूँ तो वह कई महीनों से खाट पकड़े हुए था, परन्तु आज उसकी तवियत कुछ ज्यादा ख़राब थी | उसकी पत्नी महिमा उदास-सी बैठी थी | बगल वाले डॉ. साहब दवा लिख कर दे गये थे परन्तु घर में इतने पैसे नहीं थे कि वह दवा ले आती | पैसे आते भी तो कहाँ से एक श्यामू ही तो था कमाने वाला | अभी उम्र ही क्या थी उसकी , चार वर्ष पहले ही तो विवाह हुआ था | प्राइवेट कंपनी में काम करता था महीने कि पगार से दोनों पति-पत्नी का खर्च आराम से चल रहा था परन्तु जब से वह बीमार पड़ा तब से खाने को लाले पड़ गये थे |महिमा ने सोचा शायद आज और मेडिकल स्टोर वाला दवा उधार दे दे , यही सोचकर वह उठी और मेडिकल स्टोर की ओर चल दी | काफी मिन्नतों के बाद स्टोर मालिक ने उसे दवा दे दी |
श्यामू को दवा देने के बाद वह पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी | श्यामू की हालत में कुछ सुधार आया तो वह पास पड़े अखवार जो शायद डॉ. छोड़ गये थे को उठाकर लेटे-लेटे पढ़ने लगा | उसकी विज्ञापन पर नजर पड़ी वह कुछ सोंचने लगा फिर महिमा को बुलाकर उसने वह उसे भी पढ़ाया |
‘ महिमा , मेरे बाद तुम्हारा क्या होगा , तुम्हारी जिन्दगी कैसे कटेगी |? ‘
‘ प्लीज, ऐसी अशुभ बातें मुंह से न निकालिए , आप जल्दी ही स्वस्थ्य हो जायेंगे | ‘
‘ महिमा एक बात कहूँ , तुम बुरा तो नही मानोगी ?
‘ कहिये !
‘ तुम एक बार इस विज्ञापन दाता के यहाँ जाकर देख लो , रोहन मल्होत्रा बहुत बड़ा आदमी है …..इतना पैसा जरुर मिल जायेगा की तुम्हारी जिन्दगी उसके व्याज से ही कट जाएगी |’
‘ यह आप क्या कह रहे हैं , महिमा ने आश्चर्यमिश्रित स्वर में कहा |
‘ हाँ महिमा , जब लोग मकान, कर, कपड़े आदि किराये पर दे देते हैं तो तुम यह क्यों नही कर सकती | मेरा कोई भरोसा नही – आज हूँ , कल नही | परन्तु तुम्हारे कल का क्या होगा ? यदि तुम्हे यह अवसर मिल जाये तो तुम्हारी जिन्दगी आराम से कट जाएगी | ‘ श्यामू ने कहते-कहते बेबसी से अपनी आँखें बंद कर लीं , दो मोती उसकी आँखों से निकल कर गालों पर ढलक आये थे |
‘ ठीक है , मैं यह करूंगी लेकिन अपने लिए नही ; आपके लिए ‘ महिमा ने कहा |
************ रोहन के ऑफिस के बाहर चार-पांच महिलाएं बैठी थी | अन्दर रोहन के साथ डॉ. मनीष भी थे | एक-एक कर महिलाएं साक्षात्कार के लिए जा रही थीं , महिमा का चौथा नम्बर था | नम्बर आने पर वह अन्दर पहुंची –
‘ क्या नाम है आपका ?’ रोहन ने पूंछा |
‘ जी , महिमा , उसने धीरे से कहा |
‘ क्या करती हो ?’
‘ हॉउस वाइफ हूँ ‘
‘ सेरोगेट मदर बनने के लिए कितना पैसा चाहिए तुम्हे |’
महिमा की आँखों में आंसू आ गये | वह धीरे से बोली –’ मेरी शादी को चार वर्ष हो गये , मैं अभी माँ नही बन सकी , यह मेरा दुर्भाग्य है – मुझे अपनी कोंख की कीमत नही चाहिए | मैं एक मजबूर औरत हूँ , आप मेरे पति के इलाज का जिम्मा ले लीजिये और मैं आपके बच्चे को जनने के लिए तैयार हूँ |’ महिमा ने बेबसी परन्तु बेबाकी से कहा तो उसके यह शब्द रोहन के ह्रदय को छू गए | उसने डॉ. मनीष की तरफ देखा फिर महिमा की तरफ देखकर बोले -’ठीक है , आप अपने घर का पता दे दीजिये और जाईये |’
*********** अगले दिन रोहन डॉ. मनीष के साथ महिमा के घर पहुंच गया | डोरबेल बजी तो महिमा ने दरबाजा खोला – सामने रोहन को देख चौंक गयी – ‘ आप ?’
‘ हाँ , मैं …. कहां हैं आपके पति, डॉ. साहब उन्हें देखना चाहते हैं |’
श्यामू का इलाज एक अच्छे अस्पताल में शुरू हो गया था | वह महिमा को कृतज्ञतापूर्वक देख रहा था |
‘ यह क्या किया पगली , मुझे ठीक कराके तुझे क्या मिलेगा , अब तो मुझे वह नौकरी भी नही मिलेगी |’
‘ आप मेरे पति हैं , आप सलामत रहे बस , और मुझे कुछ नही चाहिए |’
श्यामू को गर्व हो रहा था अपने भाग्य पर जो उसे महिमा जैसी संस्कारित पत्नी मिली थी |

************ कुछ औपचारिकताओं तथा महिमा का चेकअप होने के बाद गर्भाधान की प्रक्रिया शुरू हो गयी थी | रोहन और मधु के भी विभिन्न चेकअप हुए | जाँच रिपोर्ट आने के बाद डॉ. मनीष ने देखा कि रोहन के स्पर्म डैमेज हैं | वह कुछ असामान्य सा हो गया | रोहन को यह बात बतानी आवश्यक थी ,परन्तु डॉ. मनीष अपने मित्र का दिल दुखाना नही चाहता था लेकिन अन्य कोई रास्ता भी तो नही था | आखिर उसे रोहन को सब कुछ बताना पड़ा |
‘ यह क्या कह रहे हो मनीष ? क्या मैं कभी बाप नहीं बन सकता | रोहन अवाक् रह गया था |
‘ एक रास्ता है रोहन , – मनीष ने कहा |
‘ क्या ?’
‘ तुम्हारे स्पर्म कि जगह किसी डोनर के स्पर्म को मधु के जाइगोट से फर्टीलाइज करा दिया जाये | आम तौर पर जो व्यक्ति संतान उत्पन्न करने में अक्षम हैं , वे यही प्रक्रिया अपनाकर संतान सुख भोग रहे हैं |’
डॉ. मनीष ने समझाया तो रोहन भी सोचने पर विवश हो गया |
************* श्यामू के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा था, दो-चार दिनों में वह अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाला था |
आखिर वह दिन भी आ गया जब वह पूर्णतया स्वस्थ्य होकर घर जाने कि तैयारी में था | डॉ. ने सारे चेकअप करके उसे पुर्णतः स्वस्थ्य घोषित कर दिया था | श्यामू की आँखों में नई जिन्दगी की चमक थी, और थी महिमा के प्रति कृतज्ञता |
अचानक श्यामू के वार्ड में रोहन ने प्रवेश किया | रोहन को सामने देख श्यामू अपने बेड से उठ कर खड़ा हो गया तब तक रोहन उसके करीब आ चूका था |
‘ अरे श्यामू लेटे रहिये ‘ रोहन ने उसके कंधे पकड़कर बेड पर बिठाते हुए कहा और स्वयं पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया |
‘ अब तो आप बिलकुल स्वस्थ्य हो गये हैं |’
श्यामू :– ‘जी, यह आपकी ही मेहरबानी है , रोहन बाबू ; आपका यह उपकार मैं जिन्दगी भर नही भूलूंगा |’
रोहन :–’ मैंने आप पर कोई उपकार नही किया , आपका इलाज तो एक समझौते के तौर पर मैंने कराया है, लेकिन क्या आप मुझ पर एक उपकार करेंगे ?’ रोहन एक ही साँस में कह गया |
श्यामू :–’ एक गरीब भला किसी का क्या उपकार कर सकता है ?’ श्यामू आश्चर्यचकित था |
रोहन :– ‘ कर सकते हो मेरे दोस्त,परन्तु ………………….|
श्यामू :– ‘ जब दोस्त ही कह दिया तो संकोच कैसा रोहन बाबू, यह जिन्दगी आप की दी हुयी है , अब यदि आप इसे भी मांगेंगे ,तो मैं सहर्ष तैयार हूँ |’
रोहन :– ‘ पहले वादा करो कि इस उपकार को आप गोपनीय रखेंगे , इसे हम दोनों के अतिरिक्त अन्य कोई नही जानेगा , यहाँ तक महिमा भी नहीं |’
श्यामू :– ‘ वादा रहा , परन्तु ऐसी क्या बात है ? बताओ तो सही |
रोहन :– ‘ क्या आप मेरे बच्चे के लिए अपने स्पर्म मुझे डोनेट करेंगे ?’
श्यामू चौंक पड़ा —– ‘इसमें कौन सी बड़ी बात है, परन्तु आप………|
‘ मैं बाप नहीं बन सकता , क्योंकि मेरे स्पर्म डैमेज हैं |’ रोहन के शब्दों में वेदना थी |
‘ ओह , आप चिंता न करें रोहन बाबू मैं यह कम करूँगा और पूर्ण गोपनीयता के साथ करूंगा |’ श्यामू के शब्दों में द्रढ़ता के भाव थे |
********** श्यामू के शुक्राणु को मधु के अंडाणु से निषेचित कराकर भ्रूण को महिमा के गर्भाशय में सफलता पूर्वक स्थापित कर दिया गया | डॉ. मनीष अपनी इस सफलता पर काफी प्रसन्न था | मधु भी खुश थी ,परन्तु रोहन अवसाद में डूबा हुआ था |
************** रोहन का पैर अपनी कार के एक्सीलेटर पर था परन्तु अवसाद का घना कोहरा उसके दिलो दिमाग पर छाया हुआ था | वह इस बात को ही भूल गया था कि वह ड्राइव कर रहा है ,ऐसी परिस्थिति में जिस बात की आशंका होती है वाही हुआ | रोहन का एक्सीडेंट हो गया था | काफी प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका |
************** इतना सब हो जाने के बाद भी मधु को जीवन की क्षणभंगुरता का एहसास नही हुआ था | हालाँकि उसने रोहन के बिजनेस को अपने हांथों में ले लिया था | और सफलता पूर्वक उसे मैनेज भी कर रही थी, परन्तु अपने पिता,भाई आदि की सलाह पर उसने महिमा की कोंख में पल रहे अपने बच्चे को नकार दिया था | एक दिन उसने महिमा को घर बुलाया -
‘ महिमा मैं चाहती हूँ कि तुम इस बच्चे के पालन-पोषण के लिए पैसा ले लो और मेरी जिन्दगी से दूर चली जाओ |’ मधु ने कहा तो महिमा सकते में आ गयी |
‘ यह क्या कह रही हैं आप ‘ आश्चर्य मिश्रित स्वर में महिमा ने कहा |
‘ जब रोहन ही नही रहा तो इस बच्चे को लेकर मैं अपनी जिन्दगी बर्बाद नहीं करना चाहती ‘ मधु ने बिना लाग-लपेट के अपनी बात कह दी |
‘ माँ का गौरव पाने में यदि जिन्दगी बर्बाद होती है , तो शायद दुनिया की कोई लडकी माँ नही बनना चाहती , फिर यह बच्चा रोहन की निशानी है | कोंख मेरी जरुर है पर जैविक माँ आप ही हैं|’ महिमा ने कहा, परन्तु मधु पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा | वह बच्चे को लेकर अपने मकसद में कामयाब नही हो सकती थी , उसका इरादा दूसरा विवाह करने का था |
मधु :– ‘ तुम्हे मैंने यहाँ भाषण देने नही बुलाया है | कीमत बोलो , क्या लोगी इस बच्चे को लेने का |’
‘ तुमने मुझे अपने ‘एग’ देकर बहुत पहले ही इसे अपनाने की कीमत दे दी है | मुझे कुछ नही चाहिए |’ इतना कह महिमा तेज कदमों से वहां से चल दी | घर पहुँचाने पर जब सारी बातें श्यामू को मालूम हुयी तो वह ख़ुशी से झूम उठा |
‘ महिमा , भगवान जब देता है तब छप्पर फाड़ कर देता है |’
‘ क्या मतलब है आपका |’
‘ तुम्हारी कोंख में मेरा बच्चा पल रहा है’ श्यामू ने रहस्य पर से पर्दा उठा दिया था |
‘ हाँ महिमा, रोहन ने मुझसे वचन लिया था कि यह बात मैं किसी को न बताऊँ |’
‘ परन्तु ऐसा कैसे हुआ ?’
‘ क्योंकि रोहन के स्पर्म डैमेज थे …………’फिर परत-दर-परत रहस्य से पर्दा उठता गया |
श्यामू ने पुनः कहना प्रारंभ किया –’ महिमा , इस बच्चे में ‘ एग ‘ अवश्य मधु के हैं परन्तु स्पर्म मेरे और कोंख तुम्हारी है , माँ वही होती है जो प्रसव पीड़ा को महसूस करे, उसे पाले -पोसे | कानूनन भी मैं जैविक पिता हूँ इस नाते यह मेरा बच्चा, और तुम मेरी पत्नी हो इसलिए यह हमारा बच्चा है |’
महिमा मधु कि नादानी से व्यथित अवश्य थी परन्तु वह औलाद के सुख की कल्पना से खुश थी | वह नियमित रूप से अपना चेक-अप कराती रही और निश्चित समय पर एक सुन्दर बेटे को जन्म दिया था उसने |

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725 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Denver के द्वारा
July 11, 2016

Intéressant, mais attention: ne fonctionne que si on est en mode de connexion non sécurisée. Sinon, on a le message suivant au sen&u:«utbsp;Errepr pendant le chargement de Events CalendarAucune réponse reçue. »Juste dommage que le calendrier soit en anglais… et non configurableMerci pour cette appli!

राही अंजान के द्वारा
October 19, 2011

आदरणीय डॉ कैलाश जी, सुंदर एवं मार्मिक विज्ञान कथा……जो आजकल के कथित उच्च वर्ग की मानसिकता का भी बोध कराती है । बहुत खूब….हार्दिक आभार !! :)

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय राही अंजान जी, सादर अभिवादन ! अभ्युदय पर आपका स्वागत है , आपने समय दिया , धन्यवाद |

    Carlynda के द्वारा
    July 12, 2016

    Hiya, I am really glad Ive discovered this inrmaoftion. These days bloggers publish only about gossips and net and this is actually annoying. A good web site with fascinating content, that is what I require. Thank you for keeping this website, I will probably be visiting it. Do you do newsletters? Cant find it.

Abdul Rashid के द्वारा
October 19, 2011

आदरणीय डॉ.कैलाश जी आधुनिकता की अंधी दौर में और क्या उम्मीद क्या जा सकता है दीपावली की हार्दिक सुभकामनाओ के साथ सप्रेम अब्दुल रशीद http://singrauli.jagranjunction.com

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय अब्दुल रशीद जी सादर अभिवादन ! सच कह रहे हैं आप ………धन्यवाद एवं दीपावली की हार्दिक पूर्व शुभकामनायें !

    Jayhawk के द्वारा
    July 12, 2016

    Moi qui ai bien ecoute The Cure dans les annees 80, je trouve cela plutot rarihfcaissant que des jeunes filles s’en inspirent. Peut-etre que c’est enfin la fin du rap!

Amita Srivastava के द्वारा
October 18, 2011

डॉ कैलाश जी आधुनिकता की दौड़ मे अंधी नारी का भयानक रूप अच्छी रचना |

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय अमिता जी सादर अभिवादन ! आपने समय दिया आपका बहुत-बहुत आभार |

    Butterfly के द्वारा
    July 12, 2016

    El pueblo nunca tuvo quien lo defendiera de nada, salvo el mismo si es capaz de unirse y trabajar por sus propios itereses que nunca son los intereses del estado, delpoder, y muchisimo menos del dinero o el mercado.Es lo que hay, de los pobres nadie se preocupa salvo para exopntarlos.

roshni के द्वारा
October 18, 2011

कैलाश जी बहुत ही अच्छी कहानी ……..

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    धन्यवाद रोशनी जी !

abodhbaalak के द्वारा
October 18, 2011

ह्म्मम्म्म्मम्म्म्म कैलाश जी कुछ याद करने की कोशिश कर रहा हूँ :) खैर, एक अत्यंत ही खूबसूरत रचना, आजके परिवेश को दर्शाती, लिखते रहें भाई मेरे, और मंच पर अपनी छटा बिखेरते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय भाईसाहब, सादर प्रणाम ! आपकी याददास्त की दाद मैं पहले भी दे चूका हूँ , आप सही सोंच रहे हैं | आशीर्वाद हेतु आपका बहुत-बहुत आभार !

    Krystallynn के द्वारा
    July 12, 2016

    Hi Nik, a very moving post. What a goreuogs family you all are. So good that you can all support your Dad and each other through tough times. Thanks for sharing the lovely photos and sending you a cyber hug! Liz xx

akraktale के द्वारा
October 18, 2011

आदरणीय डॉ. साहब नमस्कार, बहुत ही अच्छी तरह से आपने सेरोगेट माँ की कहानी प्रस्तुत की है,बहुत कुछ सत्य के निकट ही है. मगर क्या ये विज्ञानं की उन्नति का दुरपयोग नहीं है? फिर कुछ समाचार सेरोगेट माँ द्वारा बच्चे के हस्तांतरण ना करने के बारे में भी आये हैं. बहुत ही सुन्दर लेखनी मै तो पूरी तरह से इस कहानी में खो ही गया था. बधाई.

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय भाईसाहब, सादर प्रणाम ! वास्तव में हर चीज के दो पहलू होते हैं , यह तो व्यक्ति के ऊपर निर्भर है कि वह किस पहलू का उपयोग करता है | आपने समय दिया …..धन्यवाद , बधाई हेतु बहुत-बहुत आभार !

    akraktale के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय डॉ. साहब मेरा आशय सिर्फ कहानी तक ही था. सदुपयोग पर तो मै सहमत हूँ बल्कि मेरा तो यह कहना है की ये विज्ञानं का वरदान है.

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय भाईसाहब, सादर प्रणाम ! मै आपका आशय समझता हूँ |

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 18, 2011

प्रिय डॉ कैलाश जी मन को छू जाने वाली कहानी सच में सर्रोगेट वोमन की गजब कहानी है कई सिनेमा भी मैंने देखे इस पर ..क्या क्या भाव अच्छे बुरे आते हैं मन में ..फैसला करना कितना कठिन हो जाता है की इसे कितना उचित ठहराएं ..कहीं कहीं निःसंतान लोग के लिए इसे जायज ठहरा देते हैं तो कहीं कहीं केवल पैसे के लिए औरतों को कोख किराये पर देना और अपने जाने बच्चे को दूर कर देना दिल को कचोट जाता है दर्द भर जाता है मानवता पर एक प्रश्न चिन्ह लग जाता है ..किया ही क्या जाए हमारा ये मानव जीवन भी आज बिना समझौते के चल नही पाता एक पग भी ..इस लिए सब वक्त के हिसाब से जायज ठहरा भी देता है मन ..बहुत सुन्दर विषय आप का ..बहुत आभार .जो भी हो औरत को सम्मान मिले और बच्चे को भरपूर प्यार ..\ भ्रमर ५ महिमा , इस बच्चे में ‘ एग ‘ अवश्य मधु के हैं परन्तु स्पर्म मेरे और कोंख तुम्हारी है , माँ वही होती है जो प्रसव पीड़ा को महसूस करे, उसे पाले -पोसे | कानूनन भी मैं जैविक पिता हूँ इस नाते यह मेरा बच्चा, और तुम मेरी पत्नी हो इसलिए यह हमारा बच्चा है |’ महिमा मधु कि नादानी से व्यथित अवश्य थी परन्तु वह औलाद के सुख की कल्पना से खुश थी

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय शुक्ल जी सादर प्रणाम ! मज़बूरी इन्सान से क्या-क्या नहीं करवाती परन्तु हमें हमारी नैतिकता को कभी नहीं भूलना चाहिए | इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार !

    Suzy के द्वारा
    July 12, 2016

    Alguien, no se cuando, me habló de las trece rosas. Un día, cayó en mis manos, su historia en forma de libro. Más tarde supe que habían llevado a la pantalla grande su historia y acudí a verla. Hoy, gracias a Carmen, he sabido de este homenaje hacia aquellas mujeres a quienes admiro prftnndameuoe. Permiteme que me una a tu homenaje hacia ellas, en esta tu propuesta. Saludos, Rafa.

nishamittal के द्वारा
October 18, 2011

कहानी का ताना-बना बहुत ही सुन्दर परन्तु कितनी बड़ी विडंबना ,नारी का ये रूप ! आधुनिकाओं के इस स्वरूप के विषय में पूर्व में भी पढ़ा है.भाग्य बलबान है जैसा की कहानी का अंत बताता है.

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय दीदी सादर प्रणाम ! आपने समय दिया आपका बहुत-बहुत आभार |

    Mahala के द्वारा
    July 12, 2016

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syeds के द्वारा
October 18, 2011

कैलाश जी, आधुनिकता की दौड़ में सभी लगे हुए हैं, नारी भी इससे अछूती नहीं रही है..बेहतरीन कहानी के लिए बधाई के पत्र हैं… http://syeds.jagranjunction.com

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय syeds भाई सादर अभिवादन ! आधुनिक होना गलत नहीं परन्तु अपनी संस्कृति को भूलना गलत है |आपकी बधाई के लिए ह्रदय से आभार !

    Yancy के द्वारा
    July 12, 2016

    I have been browsing on-line more than 3 hours nowadays, yet I certainly not found any fannisaticg article like yours. It’s lovely worth enough for me. Personally, if all site homeowners and bloggers made just right content materials as you did, the online will most likely be far more useful than ever before.

alkargupta1 के द्वारा
October 18, 2011

डॉक्टर साहब , नारी की बदलती आधुनिक विचारधारा को दर्शाती हुई बहुत बढ़िया कहानी की प्रस्तुति ! बधाई !

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय दीदी सादर प्रणाम ! उत्साहवर्धन एवं आपकी बधाई के लिए ह्रदय से आभार !

    Lizabeth के द्वारा
    July 12, 2016

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Manoj के द्वारा
October 18, 2011

यह मात्र एक कहानी नहीं आज की बिगड़ती तथाकथित आधुनिक नारी पर करारा प्रहार है. अजब की कहानी है य्ह बेहतरीन

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय मनोज जी, सादर अभिवादन ! आपने कीमती समय दिया आपका बहुत -बहुत आभार !

    Geraldine के द्वारा
    July 12, 2016

    e7Hey there. I found your blog by way of Google while searching for a related matter, your website came up. It seems to be great. I have boakomrked it in my google bookmarks to visit later.

sadhana thakur के द्वारा
October 18, 2011

कैलाश जी ,बहुत ही अच्छी कथा ,हर तरह से पूर्ण ,बधाई हो ,यूँ ही लिखते रहिये ………..

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय साधना बहन जी , सादर अभिवादन ! उत्साहवर्धन हेतु ह्रदय से आभार !

    Candie के द्वारा
    July 12, 2016

    Hvor er de bare blevet flotte dine 2 kager, kender godt det med at liiige mÃ¥ presse det ind.. Synes du har fÃ¥et et godt resultat.. er vild med den yndige lilla farve du har brugt, hvilken farve er det?? Har kun selv en der er meget mørk synes jeg fra suaarflgir…

Santosh Kumar के द्वारा
October 18, 2011

आदरणीय डॉ. साहब ,.सादर नमस्कार बहुत सुन्दर आधुनिक समस्याओं को उभरती मानवीय रचना ,. नाम क्या रखना है ?…अगली कहानी का मीठा बच्चा हाजिर है ,..गुरुदेव की आज्ञा तो मिल ही जाएगी ,..हार्दिक शुभकामनाये ,..

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय भाईसाहब, सादर अभिवादन ! चलिए अगली कहानी का शीर्षक आप ही बता दीजिये ………..| उत्साहवर्धन हेतु ह्रदय से आभार !

    Pait के द्वारा
    July 12, 2016

    This is nothing short of TREASON. Sad day for CANADA when our Leaders sell our people out for 30 shekels of gold.Our future generations will CURSE this generation for giving away our resources to a group of CORRUPT EFIT RULERS of an COMMUNIST DIAIHTORSCTP !!!

UMASHANKAR RAHI के द्वारा
October 17, 2011

प्रिय डॉ. साहब नैतिक मूल्यों को दर्शाती बहुत सुन्दर रचना …………ऐसे ही लिखते रहो !

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय भाई साहब, सादर प्रणाम ! ऐसे ही आशीर्वाद बनायें रखें |

    Egypt के द्वारा
    July 12, 2016

    Lol you have no idea how bad it was hehe. but that time away has been the best thing for me in terms of getting my energy back and give the internet a new shot!I just ca;1&82#7nt put it anymore with my 9-5 job.. gotta make this work We’ll make it Carrie! and thanks for following me too

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 17, 2011

आदरणीय डाक्टर साहिब ….. सादर अभिवादन ! आपने इस कहानी का तानाबाना बहुत ही अच्छा बुना है और इसको एक सुखद अंजाम तक पहुँचाया है … उस बच्चे का नाम क्या है ?…… अब इस बात पर हसियेगा मत http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/10/17/“खुदा-का-खत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 17, 2011

    आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम ! आपके द्वारा किये गये उत्साहवर्धन के लिए आभार | बच्चे का नाम से एक विचार आया , यदि आपकी आज्ञा हो तो कहानी का दूसरा भाग इसी बच्चे को केंद्र में रखकर लिख डालूं | एक निवेदन है ,सुना है आप के पास हर मर्ज की दवा है तो मै और मैं ही क्यों लगभग सभी ब्लागर कुछ ऐसे ब्लागरों से परेशान हैं, जो अपनी एक ही रचना को कई बार पोस्ट करके jj के पहले पेज पर छा जाते है और बेचारे अन्य ब्लागर बहुत जल्दी दूसरे-तीसरे पेज पर खिसक जाते हैं | इनको सदबुद्धि दे दो प्लीज …..|

    Santosh Kumar के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय गुरुदेव ,.सादर प्रणाम आदरणीय डॉ. साहब ,.सादर नमस्कार मैंने इस बारे में अपने ब्लाग पर भी बात राखी है ,..आप दोनों मिलकर सद्बुद्धि की दवाई पर अनुसंधान करें ,…सभी अपने पडोसी ,सहकर्मी ,.बॉस के लिए जरूर खरीदेंगे ,..साभार

    Syeds के द्वारा
    October 18, 2011

    प्रिय डाक्टर कैलाश साहब, आपकी इस समस्या के बारे में मैंने जे जे टीम को लिखा है और कुछ सुझाव भी दिए हैं जो इस तरह हैं.. १- अगर कोई पाठक(जिसने लोग इन किया हुआ है) किसी पर्टिकुलर ब्लोगर की पोस्ट नहीं देखना चाहता है तो उसके पास’इस ब्लोगेर की पोस्ट न दिखाएं’ जैसा कोई आप्शन होना चाहिए. २- दूसरा सुझाव यह है की ब्लोगेर्स के पास spam रिपोर्ट करने का आप्शन हो,जिसको जे जे टीम देखे और उचित फैसला/कार्यवाही करे. मेरे ख्याल में इनसे जागरण मंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. धन्यवाद. http://syeds.jagranjunction.com

    naturecure के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय syeds जी, बहुत अच्छा सुझाव दिया है आपने | jj यदि इस पर अमल कर ले तो निश्चित रूप से लेखकों /पाठकों को बड़ी सहुलियत मिलेगी | एक निवेदन है आपसे आप कृपया अपना नाम एक बार हिंदी में लिखने की कृपा करें | “हम बहुत कन्फ्यूज हूँ ………….| “

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय डाक्टर साहिब ….. सादर प्रणाम ! मैंने पहले भी इसी विषय पर एक कहानी पढ़ी थी जिसमे कि उस किराए कि कोख वाली माता से बच्चा लेने वाले कि असमी ही मौत हो जाती है और वोह बेचारी बिना पैसे के ही उस अनचाहे बच्चे को पालने पर मजबूर हो जाती है …… ****************************************************************************** वैसे मेरा पुलसिया दिमाग कहता है कि शायद आपको उस बच्चे का नाम पता है ….. आप इस कहानी का पार्ट -टू बनाए इस पहले भाग से ही अंदाजा हो रहा है कि दूसरा भाग जबरदस्त होगा क्योंकि इसमें अपार संभावनाए छिपी हुई है ….. ********************************************************************************************************** जिस तरह के बेशर्म और ढीठ ब्लागरों का आपने जिक्र किया है उनमे से एक को तो मैंने उनके बेहद सफेद बालो के बावजूद भी कड़वी दवाई दी थी लेकिन उसका असर केवल कुछेक दिन ही रहा ….. अब हम सभी को ऐसे ब्लागरों के ब्लॉग पर जाकर नीम वाली दवाई का हैवी डोज देना चाहिए ….. जागरण के फीडबैक पर भी कोशिश कि जा सकती है हमारे प्रिय सैयद भाईजान कि ही तरह से …… ************************************************************************************************************** हमारे प्रिय संतोष भाई के इस मुहीम में बढ़ चढ़ कर भाग लेने और साथ देने कि हम सभी को उम्मीद और आशा है ….. मैं उम्मीद करता हूँ कि हम सभी पीड़ित जन मिलजुल कर इस समस्या का कोई न कोई हल जरूर निकाल ही लेंगे ….. नहीं तो फिर मुझको राजकमल हजारे बनना पड़ेगा आखरी उपाय के तौर पर …. हा हा हा हा आप सभी को सपरिवार दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/10/17/“खुदा-का-खत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय गुरुदेव, सादर प्रणाम ! बच्चे का नाम…..????? अब यह मत कह देना कि ….कहीं यह बच्चा …..??? हा.. हा.. हा.. | कहानी का कहानी का पार्ट -टू बनाने का प्रयत्न कर रहा हूँ आप सब का आशीर्वाद रहा तो जल्द ही प्रस्तुत होगा | सफेद बालो वाला सठिया गया है ………. उसकी समझ में ज्यादा देर कोई बात नहीं टिकती | …….नीम वाली दवाई का हैवी डोज से नपुंसकता का खतरा रहता है ……..अब इतनी भी कड़ी सजा कम से कम आप जैसा नरम दिल व्यक्ति नहीं दे सकता | ………. संतोष भाई की बात ही कुछ और है वे आल राउंडर हैं शायद कोई हल निकाल लें | …..सैयद भाईजान भी प्रयासरत हैं मुझे यह जानकर तसल्ली है कि मैं अकेला सताया हुआ नहीं हूँ| ……….आखरी उपाय की परिणिति …….राजकमल हजारे……के रूप में … …चिंता मत करना गुरुदेव एक प्राकृतिक चिकित्सक होने के नाते मुझे भी लम्बे उपवास का अभ्यास है , आपका पूरा साथ दूंगा | आप सभी को भी सपरिवार दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये | आभार !

    Ranessa के द्वारा
    July 11, 2016

    Posted on December 21, 2012 at 12:33 pmI do agree with all of the concepts you have presented within your post. They may be actually convincing and will undoubtedly perform. Neslvtheeers, the posts are extremely brief for newbies. Could you please extend them somewhat from subsequent time? Thanks for the post.


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