अभ्युदय

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देख तमाशा किस्मत का ||

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जनता का सरताज बना है,

यहाँ लुटेरा अस्मत का ||


वाह रे वाह कानून देश का,

लिए कटोरा रहमत का ||


अपना – अपना राग अलापे,

सपना बन गया सहमति का ||


होता है जो – होने दो अब,

कोई न साथी जहमत का ||


मंहगाई की मार है ऐसी,

कसा शिकंजा किल्लत का ||


पढ़ा – लिखा फिरता है मारा,

देख तमाशा किस्मत का ||


आवारा अफसर बन बैठा,

ले के सहारा रिश्वत का ||


जीवन यह बेजार हो गया,

ताना सुन-सुन जिल्लत का ||

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